गर्म तासीर वाली अदरक और इसका सूखा हुआ रुप सोंठ, हर तरह से अपनी महत्ता के चलते रसोई से लेकर आयुर्वेद तक कायम रखे हुए है अपना जादू……
आम तौर पर अदरक को मसालों की सूची में शामिल किया जाता है हालांकि जब हम कहते हैं “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद!” तब यह तो स्वीकार करते ही हैं कि स्वाद के साथ इसका संबंध किसी मसाले से कम नहीं है। यह बात न जाने क्यों आसानी से नजरअंदाज की जाती है कि अधिकांश भारतीय व्यंजनों में पिसे अदरक- लहसुन का ही प्रयोग होता है।
पहले जहां इसे सिल-बट्टे पर ताजा पीसा जाता था, अब इसकी खपत देखकर अनेक कंपनियां रेडीमेड अदरक या अदरक- लहसुन का पेस्ट बाजार में उतार चुकी है।
सात्विकता से भरपूर
अदरक मूल संस्कृत शब्द आर्द्रक का अपभ्रंश है जिससे यह सकेंत मिलता है कि यह खुश्की दूर करती है और तरावट देती है। अंग्रेजी में इसे जिंजर कहते हैं जो प्राकृत के श्रांगवेर से उपजा है। यह नाम इसे इसकी शक्ल को देखकर दिया गया था- ऐसी गांठवाली जड़ जिस पर सींग नजर आते हैं।
हल्दी के परिवार (रिजोम) की सदस्य अदरक में कसैलापन लिए तीखा स्वाद होता है जिसे अंग्रेजी में “एस्ट्रिंजैंट” कहते हैं। अदरक को सात्विक समझा जाता है और ब्रह्मचारी बौद्ध भिक्षु अपने खाने में इसे बेहिचक शामिल कर सकते थे। इसकी पुष्टि जातक कथाओं से होती है। विद्वानो का मत है कि अदरक का जन्म अन्य बहुतेरे मसालों की तरह दक्षिण पूर्वी एशिया में हुआ।
ईसा के जन्म से सदियोंं पहले समुद्री सौदागर इसे भारत लाए और आज भारत अदरक के सबसे बड़े उत्पादकों में एक है। गुजराती में हाथ धोकर किसी के पीछे पड़ने वाले हिंदी मुहावरे का समकक्ष है- “अदरक खा कर किसी के पीछे पड़ जाना।”
What is the Indian name of ginger?
यही अदरक जब सूख जाती है तो इसे सोंठ नाम दिया जाता है। काश्मीरी पंडितों की रसोई में सोंठ अहम मसाला है। लगभग सभी सामिष और निरामिष व्यंजनों में इसका प्रयोग होता है। क्या चाट की कल्पना खट्टीमीट्ठी सोंठ के अभाव में की जा सकती है?
खटाई के लिए आप चाहें इमली को चुनें या आमचूर को, यह गाढ़ी चटनी बिना सोंठ के नहीं बन सकती! थाईलैंड के खान-पान में गलांगल नामक अदरक की प्रजाति का इस्तेमाल लेमन ग्रास और काफिर लाइम के साथ होता है। चीनी खाने में अदरक को चाशनी में लपेटकर मुरब्बे के कतरे की शक्ल में पेश किया जाता है।
जिंजर पुडिंग, जिंजर नट बिस्किट जैसे बेकरी के उत्पादों में भी अदरक अपना जादू जगाती है। तो वहीं अनेक कांटिनेंटल व्यंजनों को बरीक कटी अदरक की तीलियों से सजाया जाता है। फ्रांस में कुछ मदिराओं में मौजूद अदरकी महक इन्हें और मादक बनाती है, इन्हें “मल्ड वाइन” कहते हैं।
हर मौसम में है लाभदायक
अदरक का गुण यह भी है कि यह मीठे तथा नमकीन दोंनों ही प्रकार के पकवानों का साथ बखूबी निवाह सकता है। गर्मी में तन-मन को शीतल करने वाली जिंजर एल या जाड़ों में ठंड भगाने वाली मसाला चाय मिश्रण में भी अदरक की अहम भूमिका रहती है। जाड़ों में पुष्टिमार्गी मंदिरों में जो “छप्पन भोग” श्रीचरणों में नैवेद्द के रुप में समर्पित किए जाते हैं उनमें शुंठि नामक पेय भी है जिसे अदरक से तैयार किया जाता है। एक शेफ मित्र हमें अदरक के कबाब खिलाकर चकित कर चुके हैं।
खांसी में देती है राहत
आयुर्वेद के अनुसार, अदरक क्षुधावर्धक, पाचक होने के साथ-साथ खांसी में भी शहद के साथ राहत देती है। नींबू के रस में किशमिश वाला अदरक का गुलाबी अचार पारंपरिक है जबकि बड़े आकार की अदरक की परतों से तिकोने समोसे की शक्ल वाला नवजात अचार भी कम आकर्षक नहीं लगता। पौरुष को अक्षुण्ण रखने वाले पारंपरिक नुस्खों में “अदरक के पंजे” का बखान चुहलबाजी में होता रहा है।

