त्योहारों के मौके पर एक-दूसरे को गिफ्ट देने का रिवाज है। अगर गिफ्ट को सुंदर, आकर्षक तरीके से पैक करके दिया जाए, तो यह लेने और देने वाले दोनों को अच्छा लगता है। शादी- विवाह में भी लोग खूबसूरत पैक में ही गिफ्ट देना पसंद करते हैं। इसलिए पैकेजिंग उद्योग का दिनों- दिन विस्तार हो रहा है। आप कैसे इस फील्ड में स्वरोजगार प्रारम्भ कर सकते हैं आईये जानते हैं:-
तेजी से बदलते फैशन और लाइफस्टाइल के इस दौर में पैकेजिंग का महत्व बढ़ गया है। पैकिंग में सामान न सिर्फ खूबसूरत दिखता है, बल्कि उसे लाना-ले जाना भी आसान होता है, इसीलिए आज प्रत्येक छोटे-बड़े सामानों की पैकिंग की जा रही है। बाजार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इस उद्योग में स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं।
ईको-फ्रेंडली कारोबार
भारत में अभी पैकेजिंग (प्लास्टिक, पेपर, मेटल एवं ग्लास) की जो ग्रोथ है, अगर उसे सेगमेंट में बांटकर देखें, तो इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा प्लास्टिक बेस्ड पैकेजिंग का है। इसे फ्लैक्सिबल या पाउच पैकेजिंग भी कहा जाता है। प्लास्टिक पैकेजिंग लचीलेपन और टिकाऊपन के कारण अधिक पसंद किया जाता है।
इसे री-साइकल करके दूसरी चीजें भी बनाई जा सकती हैं। मार्केट में प्लास्टिक के बाद पेपर पैकेजिंग की हिस्सेदारी ज्यादा है। पेपरबेस्ड पैकेजिंग को गत्ता पैकेजिंग भी कहते हैं। पेपर पैकेजिंग को पसंद करने के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि पेपर ईको- फ्रेंडली होता है।
लागत एवं संसाधन
पैकेजिंग का यह कारोबार कुछ लाख रुपये से लेकर करोड़ रुपये तक की पूंजी लगाकर शुरु कर सकते हैं। वैसे, अगर प्लास्टिक/ पेपर पैकेजिंग का कोई लघु उद्योग शुरु करना चाहते हैं, तो कम से कम 15 से 20 लाख रुपये की पूंजी होनी चाहिए। इतनी पूंजी में आपका सारा सेटअप तैयार हो जाएगा। मान लीजिए, आप पेपर पैकेजिंग का सेटअप लगाना चाहते हैं, तो इसमें भी कई तरह के पैकिंग मैटीरियल तैयार होते हैं, जैसे पेपर से गत्ता/गत्ता बॉक्स बनता है। मोनो कार्टन बनता है। डुप्लेक्स बोर्ड बनता है। पेपर से कप-प्लेट भी बनते हैं। कैरी बैग बनते हैं। इन सब चीजों को बनाने के लिए अलग- अलग मशींने चाहिए।
किसी एक मशीन से सारी चीजें नहीं बना सकते, इसलिए कोई भी यूनिट लगाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि किस तरह की पैकेजिंग में जाना चाहते हैं। फिर उसी हिसाब से मशीनरी और सेटअप वगैरह लगाएं। इस तरह की छोटी फैक्ट्री लगाने के लिए करीब 8 से 10 लोगों की जरुरत होगी। इनके लिए करीब 300 गज का स्पेस होना चाहिए।
ट्रेनिंग जरुर लें
इस कारोबार में आना चाहते हैं, तो बेहतर यही रहेगा कि ट्रेनिंग लेकर आंए, क्योंकि यह अलग तरह का उद्योग है, जिसकी जानकारी के लिए ट्रेनिंग जरुरी है। भारतीय पैकेजिंग संस्थान लोगों को इस तरह की ट्रेनिंग देता है। यह ट्रेनिंग तीन महीने की अवधि की है। इसके अलावा, हफ्तेभर की भी ट्रेनिंग/कंसल्टेंसी दी जाती है, जिसे कभी भी ले सकते हैं। इस ट्रेनिंग के अंतर्गत लोगों को पैकेजिंग की बेसिक जानकारी से लेकर मशीन व लागत, आपकी रुचि को ध्यान में रखकर यह भी बताया जाता है कि आप कौन-सा प्रोजेक्ट लगा सकते हैं।
ऐसे चुनें एरिया
यूनिट लगाने से पहले सर्वे कराकर देख लें कि आपके आसपास में कौन- से उद्योग है। वहां किस तरह की पैकेजिंग की जरुरत है। फिर उद्योग की जरुरतों के मुताबिक पैकेजिंग यूनिट लगा लें। उदाहरण के लिए अगर आगरा की बात करें, तो वहां से गारमेंट व चमड़ा सबसे अधिक बाहर जाता है। पेठा जाता है। ऐसे में उसी को ध्यान में रखते हुए पैकेजिंग यूनिट लगाएंगे तो फायदा ज्यादा होगा। इसी तरह फिरोजाबाद में चूड़ियां बनती हैं, तो वहां कुशन बेस्ड पैकेजिंग की अधिक जरुरत होगी। इसलिए एरिया की जरुरत के अनुसार यूनिट लगाएं।
आमदनी
इसमें आमदनी इस चीज पर निर्भर करती है कि आप किस चीज की पैकेजिंग यूनिट लगा रहे हैं। इसमें पैकेजिंग एरिया के हिसाब से मुनाफा अलग-अलग है। फिर भी इसमें कम से कम 10 से 15 प्रतिशत का रिटर्न आराम से मिलेगा।

