हाल की एक स्टडी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत Chocolate का सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन गया है। यह सच भी है। शायद ही किसी को Chocolate का क्रीमी और चॉकलेटी टेस्ट पसन्द न हो। आजकल तो यह ऐसा सदाबाहर प्रोडक्ट बन गया है, जो हर मौके के लिए उपयुक्त माना जाता है।
जन्मदिन, सालगिरह या त्यौहार जैसे खास मौकों पर चॉकलेट गिफ्ट के रुप में देने का चलन इन दिनों काफी बढ़ गया है। डार्क चॉकलेट तो सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है। बहरहाल, अभी बाजार में डेयरीमिल्क, मिल्की बार जैसे कई ब्रांडेड चॉकलेट कि किस्में उपलब्ध हैं। बावजूद इसके होममेड चॉकलेट की मांग भी कम नहीं है।
अपने लाजवाब फ्लेवर और पैकिंग की बजह से ये आइटम लोगों द्वारा खूब पसन्द किये जा रहे हैं। घरेलू महिलायें चाहें तो अपने किचन को ही चॉकलेट फैक्ट्री बनाकर सफल बिजनेस वूमन बन सकती हैं।
आसान है बिजनेस
चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग का यह कारोबार 3 तरह से शुरू किया जा सकता है। पहले स्टेज के तहत यह बिजनेस आप 1-2 लाख रुपये की पूंजी से घर पर भी कर सकते हैं। इस लेवल पर यह काम करने के लिए कोई प्रशिक्षित लेबर भी नहीं चाहिए। बस, दो-तीन हेल्पर्स की आवश्यकता होगी। दूसरे लेवल पर यह काम डिजाइनर शॉप या पार्लर खोलकर किया जा सकता है।
इसमें कुल 7-8 लाख रुपये की पूंजी लगेगी। इस काम में भी प्रशिक्षित लेबर की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ चार से 8 हेल्पर चाहिए। यह भी आपकी सेल और प्रोडक्शन पर निर्भर है। लेकिन इस लेवल पर यह काम करने के लिए मशीनरी भी चाहिए, जैसे कि मेल्टर, कूलिंग मशीन/फ्रिज, डिस्प्ले यूनिट इत्यादि। इस पूरे सेटअप के लिए कम से कम ₹50 लाख रुपये का पूँजी निवेश चाहिए।
इस स्टेज पर बगैर प्रशिक्षित लोगों के यह काम नहीं किया जा सकता। मैनपावर के रूप में लेबर और शेफ दोनों चाहिए। साथ में मशीनरी भी चाहिए, जैसे कि चॉकलेट मेल्टिंग-टेंम्परिंग मशीन, मोल्डिंग मशीन, कोटिंग मशीन, चॉकलेट वाइब्रेशन टेबल मशीन, स्क्रैपर एवं एजिटेटर, कूलिंग मशीन इत्यादि।
चॉकलेट कोकोआ बीन्स से बनाई जाती है। इसलिए चॉकलेट के लिए रॉ मैटेरियल रूप से सिर्फ चॉकलेट कंपाउंड चाहिए, जो दिल्ली के सदर बाजार या चांदनी चौक जैसी जगह पर मिल जाता है।
अनुभव लेकर बड़े आगे
चॉकलेट मेकिंग का यह काम बगैर अनुभव के नहीं किया जा सकता। इसके लिए अनुभव बेहद जरूरी है। इसलिए जो भी युवा यह कारोबार करना चाहते हैं, पहले उन्हें कहीं से चॉकलेट मेकिंग का प्रोफेशनल कोर्स कर लेना चाहिए। कोर्स कर लेने से यह जानकारी हो जाएगी कि चॉकलेट की क्वालिटी कैसे मेंटेन रखनी है।
इसे कितने तापमान पर बनाना है। इसकी फ्रिजिंग और पैकिंग कैसे करनी है… इत्यादि। चॉकलेट मेकिंग का बेसिक कोर्स 5-6 दिनों का होता है। एडवांस कोर्स की अवधि 1 माह है। कई संस्थान इस तरह की ट्रेनिंग उपलब्ध करा रहे हैं।

